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                                    Today is : 18/Jan/2018
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‘स्मार्ट सिटी’की अवधारणा

स्मार्ट सिटी की अवधारणा विकास के स्तर, परिवर्तन और सुधार के लिए इच्क्षुक होने और संसाधनों और शहर के निवासियों की आकांक्षाओं के आधार पर शहर–दर–शहर और एक देश से दुसरे देश के मामले में भिन्न है | स्मार्ट सिटी के लिए यूरोप की अपेक्षा भारत में इसका अर्थ अलग होगा | भारत में भी स्मार्ट सिटी को परिभाषित करने का कोई एक तरीका नहीं है |

मिशन में शहरों के मार्गदर्शन के लिए कुछ परिभाषात्मक सीमाएं अपेक्षित है | भारत में शहर में रहने वाले किसी व्यक्ति की कल्पना में स्मार्ट सिटी की छवि में अवसंरचना और सेवाओं की एक इच्क्षा सूची निहित होती है, जो उसके आकांक्षा स्तर को व्यक्त करती है | नागरिकों की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शहरी नियोजन का समस्त शहरी परिस्थिति को आदर्श रूप में विकसित करने का लक्ष्य होता है जो व्यापक विकास के 4 स्तम्भों – संस्थानिक, भौतिक, सामाजिक, और आर्थिक अवसंरचना के द्वारा प्रदर्शित होता है | यह दीर्घकालीन लक्ष्य हो सकता है और शहर ऐसी व्यापक अवसंरचना में वृद्धि करते हुए, ‘स्मार्टनेस’ के स्तर शामिल करते हुए यह कार्य कर सकते हैं |

स्मार्ट सिटी मिशन के दृष्टिकोण में इसका उदेश्य उन प्रमुख शहरों को प्रोत्साहित करना है जो मुख्य अवसंरचना मुहैया कराते हैं और अपने नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर प्रदान करते हैं, एक स्वच्छ और सुस्थिर वातावरण प्रदान करते हैं और ‘स्मार्ट’ समाधान लागू करते हैं | सुस्थिर और समावेशी विकास पर जोर है और सघन क्षेत्रों पर ध्यान देने, प्रकृति मॉडल सृजित करने का विचार है जो अन्य इच्छुक शहरों के लिए प्रकाशस्तम्भ के रूप में कार्य करेगा | सरकार का स्मार्ट सिटीज मिशन एक सक्षम, नई पहल है इसका तात्पर्य ऐसे उदाहरण स्थापित करने से है जो स्मार्ट सिटी के भीतर और बाहर दोनों ओर परिलक्षित हो सके जो देश के विभिन्न क्षेत्रों और भागों में ऐसे स्मार्ट सिटी का निर्माण करने में उत्प्रेरक की भूमिका निभा सके |

एक स्मार्ट सिटी के प्रमुख अवसंरचना तत्वों में निम्नलिखित शामिल होंगे :

  1. पर्याप्त जलापूर्ति,
  2. सुनिश्चित विधुत आपूर्ति,
  3. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित सफाई,
  4. सक्षम शहरी गतिशीलता और सार्वजनिक परिवहन,
  5. विशेषतः गरीबों के लिए किफायती आवास,
  6. सक्षम आई टी कन्नेक्टिविटी और डिजीटेलाईजेशन,
  7. सुशासन, विशेषतः ई – गवर्नेस और नागरिक भागीदारी,
  8. सुस्थिर पर्यावरण,
  9. विशेषतः महिलाओं, बच्चों और वृद्ध नागरिकों की सुरक्षा और,
  10. स्वास्थ्य और शिक्षा

जहाँ तक स्मार्ट समाधानों का सम्बन्ध है एक व्यापक सूंची नीचे दी गई है | तथापि यह सम्पूर्ण सूची नहीं है, तथा शहर और अधिक अनुप्रयोगों को शामिल करने के लिए स्वतंत्र हैं |

तदनुसार स्मार्ट सिटीज़ मिशन का उद्देश्य आर्थिक विकास करना और बेहतर स्थानीय क्षेत्र विकास और प्रधौगीकी जो स्मार्ट परिणामों का मांग प्रशस्त करती है, से लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है | क्षेत्र-आधारित विकास स्लमों समेत विधमान क्षेत्रों (रिट्रोफिट और पुनर्विकास ) को बेहतर नियोजित क्षेत्रों में बदलेगा जिससे संपूर्ण शहर की वास-योग्यता बढ़ेगी | शहरी क्षेत्रों में बढ़ रही जनसंख्या को स्थान मुहैया कराने के लिए शहरों के आस – पास नए क्षेत्रों (हरित क्षेत्र) को विकसित किया जायेगा | स्मार्ट समाधानों के प्रयोग से शहरी अवस्थापना और सेवाएं बढ़ाने के लिए प्रोधोगिकी, जानकारी और आकडों का उपयोग कर सकेंगे | इस तरीके से व्यापक विकास, जीवन की गुणवत्ता बढ़ाएगा, रोजगार उत्पन्न करेगा और सभी के लिए विशेष तौर से गरीबों और वंचितों की आय बढ़ाएगा जिससे समावेशी शहरों का मार्ग प्रशस्त होगा |

स्मार्ट सिटी की विशेषताएं

स्मार्ट सिटीज़ में व्यापक विकास की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएं इस प्रकार दी गई हैं:

  1. भूमि उपयोग को और अधिक सक्षम बनाने के लिए क्षेत्र आधारित विकासों – ‘अनियोजित क्षेत्रों’ के लिए योजना जिसमे कई संगत कार्यकलाप और एक-दुसरे के निकट भूमि-उपयोग शामिल हैं, में मिश्रित भूमि उपयोग को बढ़ावा देना है | राज्य परिवर्तन को रूपांतरित करने के लिए भूमि उपयोग और भवन उप-नियमों में कुछ ढील दे सकेंगे |
  2. आवास और समग्रता-सभी के लिए आवास के अवसरों का विस्तार करती है और विभिन्न सामाजिक वर्गों में संबद्धता और परस्पर वार्तालाप को बढ़ावा देने हेतु एक सामाजिक मेल-मिलाप उत्पन्न करती है |
  3. निकट में ही इलाके बनाना-भीडभाड, वायु प्रदूषण, संसाधन विलोपन कम करना, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, परस्पर वार्तालाप तथा सुरक्षा सुनिश्चित करना | सड़क नेटवर्क न केवल वाहनों और सार्वजनिक परिवहन के लिए बल्कि पैदल यात्रियों और साईकिल चलाने वालों के लिए बनाया अथवा सज्जित किया जाता है और चलने योग्य अथवा साइकिल से तय की सकने वाली दुरी के भीतर आवश्यक प्रशासनिक सेवाएं प्रदान की जाती हैं |
  4. नागरिकों की जीवन – गुणवत्ता बढ़ाने, क्षेत्रों में शहरी गर्मी के प्रभावों को कम करने तथा सामान्यतया पारिस्थितिकि की संतुलन को बढ़ावा देने के लिए खुले स्थानों, पार्को, खेल के मैदानों और मनोरंजनात्मक स्थानों को परिरक्षित और विकसित करना |
  5. भिन्न-भिन्न प्रकार के परिवहन विकल्पों-परिवहनोंन्मुखी विकास (टीओडी), सार्वजनिक परिवहन और अंतिम दुरी पैरा परिवहन कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना |
  6. शासन को नागरिक – अनुकूल और लागत प्रभावी बनाना – जबाबदेही और पारदर्शिता लाने के लिए उत्तरोत्तर ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भर रहना विशेषतौर से सेवाओं की लागत कम करने के लिए मोबाइलों का उपयोग करना और नगर कार्यालयों में जाए बिना सेवाएं प्रदान करना | लोगों को सुनने के लिए ई – ग्रुप बनाना तथा फीडबैक प्राप्त करना और कार्यस्थलों के साइबर दौरे की सहायता से कार्यक्रमों और कार्यकलापों की ऑनलाइन मानीटरिंग करना |
  7. स्थानीय आहार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कला – कृतियों और शिल्प, संस्कृति खेल की वस्तुओं, फर्नीचर, हौजरी, वस्त्र, डेरी इत्यादि जैसे इसके मुख्य कार्यकलापों के आधार पर शहर को एक पहचान देना |
  8. अवस्थापना और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए क्षेत्र – आधारित विकास के लिए स्मार्ट समाधानों को प्रयुक्त करना | उदाहरणार्थ-क्षेत्रों को आपदाओं से सुरक्षित बनाना, कम संसाधनों का उपयोग करना और सस्ती सेवाएं प्रदान करना |

कवरेज और अवधि

यह मिशन 100 शहरों को कवर करेगा और इसकी अवधि पांच वर्ष (वित्तीय वर्ष 2015-16 और वित्तीय वर्ष 2019-20) होगी | इसके पश्चात् इस मिसन को शहरी विकास मंत्रालय द्वारा किए जाने वाले मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए जारी रखा जा सकता है और इस मिसन में अनुभवों को सम्मलित किया जा सकता है |

कार्यनीति

  1. स्मार्ट सिटी मिसन में क्षेत्र – आधारित विकास के कार्यनीतिक घटक नगर सुधार (रिट्रोफिटिंग), नगर नवीकरण (पुनर्विकास) और नगर विस्तार (हरित क्षेत्र विकास) के अतिरिक्त पैन –सिटी प्रयास जिसमें शहर के बड़े भागों को कवर करते हुए सुव्यवस्थित समाधान (स्मार्ट साल्यूशन) लागू किया जाता है | नीचे क्षेत्र आधारित स्मार्ट सिटी विकास के तीन मॉडल दिये गए हैं :
    1. रिट्रोफिटिंग को वर्तमान निर्मित क्षेत्र में स्मार्ट सिटी के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए, अन्य उद्देश्यों के साथ-साथ, योजना में शुरू किया जायेगा, जिससे वर्तमान क्षेत्र को अधिक सक्षम और रहने योग्य बनाया जा सके | रिट्रोफिटिंग में, शहर द्वारा नागरिकों के परामर्श से 500 एकड़ से अधिक के क्षेत्र को चिन्हित किया जायेगा | चिन्हित क्षेत्र में अवसंरचनात्मक सेवाओं के वर्तमान स्तर और निवासियों के विजन के आधार पर, शहर को स्मार्ट बनाने के लिए शहर कार्य नीति तैयार करेंगे | चूंकि इस मॉडल में वर्तमान ढांचे अधिकतर यथावत बने रहेंगे, यह प्रत्याशा की जाती है कि रिट्रोफिटेड स्मार्ट शहर में अधिक गहन अवसंरचनात्मक सेवा स्तर और बड़ी संख्या में स्मार्ट – अनुप्रयोग करने पड़ेगे | यह कार्यनीति अल्प समयावधि में पूरी की जाए जिससे शहर के अन्य भागों पर भी इसका प्रभाव पड़े |
    2. पुनर्विकास से वर्तमान निर्मित वातावरण का प्रतिस्थापन किया जायेगा और मिश्रित भू-प्रयोग और संवर्धित घनत्व के प्रयोग द्वारा संवर्धित अवसंरचना के साथ नये ले-आउट को सह-सृजन समर्थ बनाया जायेगा | पुनर्विकास में शहरी स्थानीय निकायों (यू एल बी) द्वारा नागरिकों के साथ परामर्श से 50 एकड़ से अधिक के क्षेत्र का पता लगाने की कल्पना की गई है | उदाहरण के लिए, पता लगाये गए क्षेत्र में, नया ले-आउट प्लान मिश्रित-भू प्रयोग, उच्च एफएसआई, और अधिक भू-कवरेज , के साथ तैयार किया जायेगा | पुनर्विकास मॉडल के दो उदाहरण मुम्बई में सैफी बुरहानी अपलिफ्टमेंट परियोजना (इसे भिण्डी बाजार परियोजना भी कहा जाता है) और नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन द्वारा आरंभ किया गया नई दिल्ली में पूर्वी किदवई नगर का पुनर्विकास हैं |
    3. हरित क्षेत्र विकास नवीकृत योजना, योजना वित्तपोषण और योजना कार्यान्वयन साधनों (जैसे लैण्ड पुलिंग / भूमिपुनर्गठन) का प्रयोग करते हुए पूर्व में खाली पड़े क्षेत्र (250 एकड़ से अधिक) में सुव्यवस्थित समाधानों को आरंभ किया जायेगा और साथ ही किफायती आवासों का प्रावधान विशेषकर गरीबों के लिए भी किया जायेगा | शहरों के आस-पास के हरित क्षेत्रों का विकास बढ़ रही आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपेक्षित है | गुजरात में जीआईएफटी शहर इसका सुविख्यात उदाहरण है | रिट्रोफिटिंग और पुनर्विकास भिन्न हरित क्षेत्र विकास या तो यूएलबी की सीमाओं के भीतर आएगा या स्थानीय शहरी विकास प्राधिकरण (यूडीए) की सीमाओं के भीतर आएगा |
    4. पैन- सिटी विकास में वर्तमान शहर-व्यापी अवसंरचना में चुनिंदा सुव्यवस्थित समाधानों के प्रयोग की कल्पना की गई है | स्मार्ट समाधानों के अनुप्रयोग में प्रौधोगिकी, सुचना और डाटा शामिल हैं, जो अवसंरचना और सेवा को उत्तम बनायेंगे | उदाहरणार्थ, परिवहन क्षेत्र में (कुशल यातायात प्रबंधन प्रणाली) स्मार्ट समाधान प्रयोग में लाना और यात्रा समय अथवा नागरिकों की लागत में कमी लाना जिससे उत्पादकता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और नागरिकों के जीवन में गुणात्मक सुधार होगा | एक अन्य उदाहरण अपशिष्ट जल पुन:चक्रण और स्मार्ट मीटर व्यवस्था है जो शहर में बेहतर जलप्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है |
  2. प्रत्येक चयनित शहर का स्मार्ट सिटी प्रस्ताव रिट्रोफिटिंग अथवा पुनर्विकास या हरित क्षेत्र विकास मॉडल अथवा उनके मिश्रण को संपुटित करेगा तथा सुव्यवस्थित समाधानों के साथ पैन-सिटी प्रदान किया जाना एक अतिरिक्त विशेषता है | चूंकि स्मार्ट सिटी काम्पेक्ट क्षेत्र दृष्टिकोण अपना रहा है, अतः यह आवश्यक हो जाता है कि शहर के सभी निवासी यह महसूस करें कि इसमें उनके लिए भी कुछ है इसलिए कुछ (कम से कम एक) शहर – व्यापी स्मार्ट समाधान की अतिरिक्त अपेक्षा भी स्कीम में की गई है ताकि इसे प्रकृति से समावेशी बनाया जा सके |
  3. पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए, विकास के लिए प्रस्तावित क्षेत्र किसी भी वैकल्पिक मॉडल – रिट्रोफिटिंग, पुनर्विकास अथवा हरित क्षेत्र विकास-के लिए निर्धारित क्षेत्र का आधार होगा |

आप सम्मानित नागरिकों का अमूल्य सुझाव, गोरखपुर शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए आवश्यक है उपरोक्त बिन्दुओं में से किसी भी बिंदु अथवा सम्पूर्ण बिन्दुओं पर अपना अमूल्य सुझाव दे |

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